Poshan Abhiyaan Launch Date & Background Guide (2026)


What Is Poshan Abhiyaan?

पोषण अभियान: शुरुआत और इसकी अनूठी सोच

8 मार्च 2018 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के खास मौके पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के झुंझुनू शहर से पोषण अभियान की नींव रखी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा कुपोषण विरोधी आंदोलन है.

यह अभियान खास क्यों है?

  • सिर्फ भोजन नहीं, पोषण: इसका लक्ष्य केवल खाना खिलाना नहीं, बल्कि बच्चों, गर्भवती माताओं और किशोरियों में पोषण की कमी (Malnutrition) को जड़ से मिटाना है.
  • नई सोच (Convergence): आप सोच रहे होंगे कि क्या पहले कोई योजना नहीं थी? योजनाएँ पहले भी थीं, लेकिन वे अलग-अलग सरकारी विभागों में बंटी हुई थीं.

खास बात: इस मिशन ने 12 से अधिक मंत्रालयों को एक साथ जोड़ा है। इसी तालमेल को ‘कन्वर्जेंस’ कहा जाता है। अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं कि पोषण अभियान क्या है, तो इसकी पूरी जानकारी यहाँ उपलब्ध है.


Why Was Poshan Abhiyaan Needed?

Shocking Numbers Before 2018


2015-16 में आए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS‑4) ने पूरे देश को चौंका दिया था.

  • 5 साल से कम उम्र के 38.4% बच्चे अविकसित (stunted) थे.
  • 21% बच्चे दुबलेपन (wasting) का शिकार थे.
  • 53% से अधिक महिलाएँ खून की कमी (anemia) से ग्रस्त थीं.

ये आंकड़े बताते थे कि मौजूदा योजनाएँ (जैसे ICDS, मिड-डे मील) अकेले कुपोषण को नहीं रोक पा रही थीं। क्या सिर्फ राशन बांटने से समस्या हल हो जाती है? नहीं, क्योंकि कुपोषण का संबंध साफ पानी, स्वच्छता, समय पर टीकाकरण और माँ की शिक्षा से भी होता है.

Malnutrition’s Hidden Cost


कुपोषण सिर्फ शारीरिक कमज़ोरी नहीं है – यह देश की तरक्की पर भारी असर डालता है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुपोषण के कारण भारत की सालाना आर्थिक उत्पादकता में करीब 2-3% की कमी आती है. कुपोषित बच्चे पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं और बड़े होकर कम कमाते हैं। इसलिए पोषण अभियान को सिर्फ एक सामाजिक योजना नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत के तौर पर देखा गया.

The Idea of Convergence


पोषण अभियान से पहले स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पेयजल, शिक्षा जैसे विभाग अपने-अपने तरीके से काम करते थे। अब इन सबको एक मंच पर लाया गया। जिला स्तर पर मासिक बैठकों में तय होता है कि अगर बच्चा कुपोषित है, तो कौन सा विभाग क्या करेगा। यही ‘कन्वर्जेंस’ का मॉडल है.


Main Pillars of Poshan Abhiyaan

1. Access to Services – हर घर तक सेवा


अंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत किया गया। अब हर केंद्र पर बच्चों का वज़न, ऊंचाई और विकास नियमित रूप से रिकॉर्ड किया जाता है।

2. Technology – पोषण ट्रैकर ऐप


मार्च 2021 में ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप लॉन्च हुआ। इससे अंगनवाड़ी कार्यकर्ता रियल टाइम में डाटा अपलोड करती हैं। अब तक देश के 14 लाख से अधिक केंद्र इससे जुड़ चुके हैं। खास बात यह है कि ऐप गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों की पहचान कर उनके इलाज की निगरानी करता है, जिससे समय पर हस्तक्षेप संभव हो पाता है।

3. Jan Andolan – जनभागीदारी


हर साल सितंबर और मार्च में ‘पोषण पखवाड़ा’ मनाया जाता है। गांवों में ‘अन्नप्राशन दिवस’ और ‘सुपोषण संवाद’ जैसे कार्यक्रम होते हैं, जहाँ माताओं को सही खानपान की जानकारी दी जाती है।

4. Capacity Building – कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग


14 लाख से अधिक अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल टूल्स, ग्रोथ मॉनिटरिंग और काउंसलिंग की ट्रेनिंग दी गई।


Evolution to Poshan 2.0

What Changed in 2021?


वर्ष 2021 के केंद्रीय बजट में ‘मिशन सक्षम अंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ की घोषणा हुई। अब पोषण अभियान को पूरक पोषण कार्यक्रम और अंगनवाड़ी सेवाओं के साथ मिला दिया गया। नई योजना का बजट ₹20,105 करोड़ (2021-26) रखा गया।

New Focus Areas

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) : अब केवल पोषण ही नहीं, बल्कि 3-6 साल के बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान। इसके तहत अंगनवाड़ी केंद्रों में खेल-खेल में सीखने की गतिविधियाँ शुरू की गई हैं, ताकि बच्चे स्कूल जाने से पहले ही तैयार हो जाएँ।
  • अंगनवाड़ी भवनों का सुदृढ़ीकरण : पानी, बिजली, शौचालय और खेल के मैदान जैसी सुविधाएँ।

PM POSHAN – School Nutrition Scheme


स्कूलों में मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर ‘पीएम पोषण शक्ति निर्माण’ कर दिया गया। 11.8 करोड़ बच्चों को पौष्टिक गर्म भोजन देने का लक्ष्य रखा गया।


Has It Worked? Data and Ground Reality

Success Stories from NFHS-5


2019-21 में आए NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुपोषण घटा है:

संकेतकNFHS-4 (2015-16)NFHS-5 (2019-21)बदलाव
स्टंटिंग (अविकसितता)38.4%35.5%2.9% कमी
वेस्टिंग (दुबलापन)21.0%19.3%1.7% कमी
अंडरवेट (कम वजन)35.8%32.1%3.7% कमी

Where Progress Is Slow


खून की कमी (anemia) अब भी बड़ी चुनौती है। NFHS-5 में महिलाओं में एनीमिया 53.1% से बढ़कर 57.0% हो गया। क्या पोषण अभियान सिर्फ बच्चों तक सीमित रह गया? नहीं, लेकिन आयरन की गोलियों और आहार में सुधार के बावजूद यह समस्या गंभीर बनी हुई है।

Case Study – World Bank’s 11 Focus States


विश्व बैंक ने 11 राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा सहित) में पोषण अभियान को सपोर्ट किया। 2015 से 2021 के बीच इन राज्यों में स्टंटिंग 41% से घटकर 37% पर आ गई। उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में स्टंटिंग में 7% की गिरावट दर्ज की गई।


Real Problems on the Ground

Anganwadi Workers Under Pressure


जुलाई 2025 से पोषण ट्रैकर ऐप पर चेहरा पहचान (facial recognition) और आधार ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई। अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने निजी फोन से डाटा डालना पड़ता है, लेकिन इंटरनेट का ₹2000 सालाना भत्ता नाकाफी है। पंजाब में सितंबर 2025 में कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की। यह डिजिटल विभाजन ग्रामीण इलाकों में और गहरा हो जाता है, जहाँ न तो नेटवर्क स्थिर है और न ही स्मार्टफोन पर्याप्त हैं।

Staff Shortage


संसदीय समिति की रिपोर्ट (मार्च 2026) के अनुसार, 33% से अधिक सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना अधिकारी) के पद खाली हैं। अंगनवाड़ी केंद्रों पर मानव संसाधन का अभाव सेवा वितरण को प्रभावित कर रहा है।

Infrastructure Gap


मई 2023 से जनवरी 2026 के बीच 17,000 लक्षित ‘अंगनवाड़ी-सह-क्रेच’ में से मात्र 132 ही बन पाए। कई केंद्रों में अब भी पीने का पानी और शौचालय नहीं है।


Real-World Examples of Change

Tamil Nadu’s Convergence Model


तमिलनाडु ने पोषण अभियान से पहले ही इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) को स्वास्थ्य विभाग के साथ घनिष्ठ रूप से जोड़ रखा था। पोषण अभियान के बाद इस समन्वय को और मज़बूती मिली। नतीजतन, राज्य में स्टंटिंग 27% से नीचे आ गई है – जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है।

Ladakh’s High-Altitude Success


लद्दाख में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, प्रशासन ने गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों की पहचान के लिए हर महीने समीक्षा बैठकें शुरू कीं। अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पोषण आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। इससे वहाँ कुपोषण के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

Annaprashan Diwas in Bihar


बिहार के समस्तीपुर जिले में ‘अन्नप्राशन दिवस’ को एक सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हर महीने की 8 तारीख को आंगनवाड़ी केंद्रों पर माताएँ अपने 6 माह के बच्चों को पहला ठोस आहार देती हैं। इस अनुष्ठान के साथ पोषण विशेषज्ञ सही आहार की जानकारी भी देते हैं। पिछले दो वर्षों में इस जिले में स्टंटिंग में 4% की गिरावट दर्ज की गई है।


Recent Updates (2025–2026)

8th Rashtriya Poshan Maah


सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री ने आठवें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की। थीम थी – ‘ओबेसिटी कम करो’, ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ (ECCE), ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और पुरुषों की भागीदारी। इन थीमों के जरिए यह संदेश दिया गया कि पोषण सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार के हर सदस्य को इसमें भूमिका निभानी चाहिए।

Swasth Nari Sashakt Parivar Abhiyan


इस अभियान के तहत महिलाओं के स्वास्थ्य को परिवार की नींव बताया गया।

Parliamentary Committee’s Findings


मार्च 2026 में संसदीय समिति ने कहा कि पोषण अभियान के तहत भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है, और अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बहुत कम है। समिति ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को आवंटित धन का उपयोग समय पर नहीं हो रहा है, जिससे योजना की रफ्तार धीमी पड़ती है।


H2: Expert Voices on Poshan Abhiyaan

(विशेषज्ञों की राय)

Expert Quote 1

“पोषण अभियान ने भारत में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को एक जन आंदोलन का रूप दिया है। लेकिन अब जरूरत है कि हम अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ मानदेय और बुनियादी सुविधाओं में भी सशक्त करें।”
— डॉ. विनोद कुमार पाल, पूर्व सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

Expert Quote 2

“जब तक हम एनीमिया की बढ़ती प्रवृत्ति को नहीं रोकते, पोषण अभियान की सफलता अधूरी रहेगी। आयरन की खुराक के साथ-साथ आहार में विविधता और स्वच्छता पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।”
— डॉ. राकेश कुमार, पूर्व निदेशक, एनआईएचएफडब्ल्यू (राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान)


Frequently Asked Questions (FAQ)

1. Poshan Abhiyaan कब लॉन्च हुआ था?


8 मार्च 2018 को राजस्थान के झुंझुनू से।

2. Poshan Abhiyaan और Poshan 2.0 में क्या अंतर है?


Poshan 2.0 (2021) में तीन योजनाओं का विलय किया गया और ECCE जैसे नए आयाम जोड़े गए।

3. Poshan Tracker ऐप क्या है?


यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिससे अंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के विकास की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करती हैं।

4. क्या Poshan Abhiyaan से कुपोषण कम हुआ है?


हाँ, NFHS-5 के अनुसार स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट में कमी आई है, लेकिन एनीमिया अब भी चिंता का विषय है।

5. Jan Andolan का क्या मतलब है?


इसका अर्थ है जनता की भागीदारी – गाँव में पोषण पखवाड़ा, अन्नप्राशन दिवस, सुपोषण संवाद जैसे कार्यक्रम।

6. कितने मंत्रालय इस अभियान से जुड़े हैं?


महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास सहित 9 से अधिक मंत्रालय।

7. Poshan 2.0 का बजट कितना है?


2021-26 के लिए ₹20,105 करोड़।

8. आम नागरिक कैसे योगदान दे सकता है?


पोषण पखवाड़े में भाग लेकर, गाँव में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाकर या स्थानीय अंगनवाड़ी केंद्र से जुड़कर।

9. पोषण अभियान में पिताओं की क्या भूमिका है?


पोषण माह 2025 में ‘पुरुषों की भागीदारी’ को थीम बनाया गया। पिताओं को गर्भवती माताओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण और पौष्टिक आहार में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

10. पोषण अभियान और ICDS में क्या अंतर है?


ICDS (आंगनवाड़ी सेवाएँ) 1975 से चल रही एक योजना है। पोषण अभियान ने ICDS को तकनीक, कन्वर्जेंस और जन आंदोलन से जोड़कर उसकी प्रभावशीलता बढ़ाई।

11. सबसे बड़ी चुनौती क्या है?


अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की डिजिटल थकान, खाली पद और बुनियादी ढाँचे की कमी।

12. क्या पोषण अभियान सिर्फ बच्चों के लिए है?


नहीं, इसमें गर्भवती माताएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और किशोरियाँ भी शामिल हैं।


Conclusion

पोषण अभियान ने भारत में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा दी। 2018 में इसकी शुरुआत से लेकर पोषण 2.0 तक का सफर बताता है कि सरकार ने इस समस्या की गंभीरता को समझा। NFHS-5 के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन एनीमिया और अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मुश्किलें अब भी हल होनी बाकी हैं। क्या हम सच में 2026 तक कुपोषण मुक्त भारत का सपना देख सकते हैं? यह तभी संभव है जब हर नागरिक, हर विभाग और हर कार्यकर्ता मिलकर काम करें।

अगर आपको लगता है कि आपके आस-पास के अंगनवाड़ी केंद्र को मजबूती की जरूरत है, तो नीचे कमेंट में बताएँ – हम सब मिलकर इस अभियान को सफल बना सकते हैं।

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