पोषण अभियान: एक कुपोषण मुक्त भारत की ओर कदम
पोषण अभियान भारत सरकार का सबसे बड़ा और प्रभावी कार्यक्रम है, जिसे देश से कुपोषण की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए शुरू किया गया था। मार्च 2018 में अपनी शुरुआत के बाद, आज यह योजना पोषण 2.0 के रूप में पूरे देश में मजबूती से लागू है। इस मिशन का असली मकसद केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सही पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना है.
क्या आप जानते हैं कि भारत में आज भी हर तीन में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार है? या फिर क्या आपको पता है कि महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) की दर एक बड़ी चिंता बनी हुई है? इन्हीं गंभीर सवालों के समाधान के लिए सरकार ने इस क्रांतिकारी अभियान की शुरुआत की.
यदि आप इस मिशन की कार्यप्रणाली और इसके दूरगामी लाभों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो आप पोषण अभियान की पूरी गाइड (2026) यहाँ पढ़ सकते हैं। आइए अब इस अभियान के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से समझते हैं.
What is Poshan Abhiyaan
Definition and Launch Year
पोषण अभियान, जिसे राष्ट्रीय पोषण मिशन भी कहा जाता है, भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसे 8 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के झुंझुनू जिले से लॉन्च किया गया था। यह योजना 2020 तक देश में कुपोषण को कम करने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी, और बाद में 2021 में इसे पोषण 2.0 के रूप में अपडेट किया गया।
Nodal Ministry and Implementing Agencies
इस योजना को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की है। हालाँकि, यह सिर्फ एक मंत्रालय की योजना नहीं है। पोषण अभियान में 12 से अधिक मंत्रालय मिलकर काम करते हैं, जिनमें स्वास्थ्य मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, और स्कूल शिक्षा मंत्रालय शामिल हैं। राज्य स्तर पर यह योजना महिला एवं बाल विकास विभागों द्वारा चलाई जाती है, और ग्राम स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्र इसकी सबसे छोटी इकाई हैं।
Evolution from Poshan Abhiyaan to Poshan 2.0
साल 2021 में सरकार ने पोषण अभियान को एक नया रूप दिया। पहले यह योजना अलग थी, लेकिन अब इसे आंगनवाड़ी सेवाओं और किशोरियों की पोषण योजना के साथ मिलाकर “सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0” नाम दिया गया है। इस बदलाव का मतलब है कि अब सिर्फ छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर ही ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि किशोर लड़कियों को भी इस योजना का हिस्सा बनाया गया है। पोषण 2.0 में “होलिस्टिक नरिशमेंट” यानी पूर्ण पोषण पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें इम्यूनिटी और समग्र स्वास्थ्य शामिल है।
Core Objectives of Poshan Abhiyaan
Stunting Reduction Target
पोषण अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कद कम होने की समस्या को कम करना है। जब एक बच्चा पांच साल का होने तक अपनी उम्र के हिसाब से पर्याप्त कद नहीं पाता, तो उसे स्टंटिंग कहते हैं। यह समस्या लंबे समय तक कुपोषण रहने से होती है। सरकार ने तय किया था कि 38.4% (NFHS-4) से स्टंटिंग की दर को घटाकर 25% तक लाना है। हालाँकि, नवीनतम NFHS-5 आंकड़ों के अनुसार यह दर 35.5% पर आ गई है, जो प्रगति तो दिखाती है लेकिन लक्ष्य से अभी भी दूर है।
Under-Nutrition and Wasting Goals
अंडर-न्यूट्रिशन यानी कम वजन की समस्या भी एक बड़ा लक्ष्य है। NFHS-4 में 35.8% बच्चे कम वजन के पाए गए थे। सरकार ने इसे घटाकर 25% करने का लक्ष्य रखा था। वहीं वेस्टिंग यानी ऊंचाई के हिसाब से वजन कम होने की समस्या को भी कम करना है। वेस्टिंग तीव्र कुपोषण का संकेत है और यह अक्सर भूख या बीमारी के कारण होता है। पोषण अभियान का उद्देश्य है कि हर बच्चे का वजन उसकी उम्र और ऊंचाई के हिसाब से सही हो, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सही ढंग से हो सके।
Anemia Reduction Targets
खून की कमी यानी एनीमिया भारत में सबसे बड़ी पोषण संबंधी समस्या है। पोषण अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य एनीमिया को कम करना है। लक्ष्य तय किया गया था कि बच्चों, महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की दर 58.6% से घटाकर 25% की जाए। लेकिन NFHS-5 के आंकड़े चिंताजनक हैं। 6 से 59 महीने के बच्चों में एनीमिया की दर 58.6% से बढ़कर 67.1% हो गई है, और महिलाओं में यह 53.1% से बढ़कर 57.2% हो गई है। इसका मतलब है कि एनीमिया पर काम करने की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ गई है।
Low Birth Weight Goals
कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को कम करना भी पोषण अभियान का एक अहम उद्देश्य है। NFHS-4 के अनुसार 16.2% बच्चे कम वजन (2.5 किलोग्राम से कम) के साथ पैदा होते थे। सरकार ने इसे घटाकर 10% करने का लक्ष्य रखा है। कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों में कुपोषण, बीमारियों और विकास में रुकावट का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Exclusive Breastfeeding Targets
स्तनपान की दर को बढ़ाना पोषण अभियान का एक और महत्वपूर्ण लक्ष्य है। NFHS-4 में केवल 54.9% बच्चों को जन्म के 6 महीने तक केवल मां का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) मिल पाता था। सरकार ने इसे बढ़ाकर 80% करने का लक्ष्य रखा है। जन्म के पहले 6 महीने में मां का दूध ही बच्चे के लिए संपूर्ण आहार होता है। इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व और एंटीबॉडीज होते हैं जो बच्चे को बीमारियों से बचाते हैं। पोषण अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नई माताओं को स्तनपान के फायदे और सही तरीके के बारे में जानकारी देती हैं।
Annual Reduction Targets
पोषण अभियान में सिर्फ पांच साल के लक्ष्य ही नहीं हैं, बल्कि हर साल की विशिष्ट कमी दरें भी तय की गई हैं। ये वार्षिक लक्ष्य योजना की प्रगति को मापने में मदद करते हैं:
| संकेतक | वार्षिक कमी लक्ष्य |
|---|---|
| स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कद) | 2% प्रति वर्ष |
| अंडर-न्यूट्रिशन (कम वजन) | 2% प्रति वर्ष |
| एनीमिया (खून की कमी) | 3% प्रति वर्ष |
| कम जन्म वजन | 2% प्रति वर्ष |
ये लक्ष्य हर साल की प्रगति को ट्रैक करने के लिए हैं। क्या हम इन लक्ष्यों को हासिल कर पा रहे हैं? NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि स्टंटिंग में तो कमी आई है, लेकिन एनीमिया में हम पीछे हो गए हैं। इसका मतलब है कि हमें एनीमिया पर और भी मेहनत करने की जरूरत है।
Strategic Pillars of Poshan Abhiyaan
Convergence
कन्वर्जेंस यानी सभी विभागों का मिलकर काम करना पोषण अभियान की सबसे मजबूत रणनीति है। पहले स्वास्थ्य विभाग अपना काम करता था, पानी विभाग अपना, और महिला एवं बाल विकास विभाग अपना। लेकिन पोषण अभियान ने सभी को एक साथ लाया है। अब जिला स्तर पर सभी विभाग मिलकर पोषण की योजना बनाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी गांव में पानी की समस्या है, तो जल शक्ति विभाग मिलकर समाधान करता है। अगर किसी गर्भवती महिला को टीका नहीं लगा है, तो स्वास्थ्य विभाग उसकी जांच करता है। यह “टीम वर्क” पोषण अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।
ICT-RTM (Poshan Tracker)
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पोषण अभियान में बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। “पोषण ट्रैकर” ऐप इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इस ऐप के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों का रियल-टाइम डेटा इकट्ठा किया जाता है। अब तक देश भर में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र इस ऐप से जुड़ चुके हैं। इस ऐप पर 10 करोड़ से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हैं। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किस बच्चे का वजन कम है, किस गर्भवती महिला ने टीका नहीं लगवाया, और किस आंगनवाड़ी में पोषण आहार की कमी है।
हरियाणा का उदाहरण: हरियाणा में पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर बच्चे की ऊंचाई और वजन की जानकारी अपलोड करती हैं। इससे सरकार को पता चलता है कि कौन से जिले में कुपोषण सबसे ज्यादा है, और वहां विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
Jan Andolan
जन आंदोलन यानी पोषण को जन आंदोलन बनाना पोषण अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार चाहती है कि पोषण सिर्फ सरकारी योजना न रहे, बल्कि हर घर की चर्चा बने। इसके लिए हर साल दो बड़े अभियान चलाए जाते हैं:
- पोषण पखवाड़ा: मार्च-अप्रैल में 15 दिन का अभियान
- पोषण माह: सितंबर में पूरा एक महीना
इन अभियानों के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं, पोषण रैलियां निकाली जाती हैं, और घर-घर जाकर लोगों को पोषण के फायदे बताए जाते हैं। 2025 में पोषण पखवाड़ा 8 से 23 अप्रैल तक मनाया गया था, जिसमें देश भर में लाखों लोगों ने भाग लिया।
Capacity Building and Training
पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण बहुत जरूरी है। सरकार ने ILA (इंक्रीमेंटल लर्निंग अप्रोच) नाम से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण, स्वास्थ्य, और पोषण ट्रैकर ऐप का उपयोग सिखाया जाता है। अब तक लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हालाँकि, डिजिटल साक्षरता की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। कई ग्रामीण इलाकों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन चलाना नहीं आता, जिससे ऐप का इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है।
Mission Poshan 2.0 Updates
Changes Introduced in 2021
साल 2021 में सरकार ने पोषण अभियान को “पोषण 2.0” के रूप में बदला। यह बदलाव क्यों जरूरी था? पहले तीन अलग-अलग योजनाएं थीं – आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान, और किशोरियों के लिए पोषण योजना। इन तीनों को मिलाकर एक ही योजना बना दी गई। इसका फायदा यह हुआ कि अब सभी काम एक ही छत के नीचे होने लगे। पोषण 2.0 में किशोरियों (11 से 14 साल) को भी योजना का हिस्सा बनाया गया, क्योंकि किशोरावस्था में पोषण का असर जीवन भर रहता है।
Expanded Target Groups
पोषण 2.0 में लाभार्थियों की सूची बढ़ा दी गई है। अब इस योजना के तहत निम्नलिखित सभी लोग शामिल हैं:
- 0 से 6 साल तक के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- स्तनपान कराने वाली माताएं
- 11 से 14 साल की किशोर लड़कियां
यह विस्तार इसलिए किया गया क्योंकि किशोरावस्था में पोषण की कमी सीधे गर्भावस्था और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। अगर एक किशोर लड़की कुपोषित है, तो उसका बच्चा भी कुपोषित पैदा होगा। यह एक चक्र है, जिसे पोषण 2.0 तोड़ना चाहता है।
Budget Allocation 2026-27
पोषण अभियान के लिए बजट हर साल बढ़ रहा है। 2026-27 के केंद्रीय बजट में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को ₹28,183 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसमें से पोषण 2.0 के लिए ₹23,100 करोड़ (80% से अधिक) का प्रावधान है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पोषण सेवाओं की पूरी मांग को पूरा करने के लिए लगभग ₹48,000 करोड़ की जरूरत है। इसका मतलब है कि बजट बढ़ने के बावजूद जरूरत के मुकाबले यह अभी भी कम है। महंगाई और बढ़ती आबादी को देखते हुए वास्तविक रूप में यह बढ़ोतरी बहुत कम है।
Progress and Current Data
NFHS-5 Comparison with NFHS-4
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े पोषण अभियान की प्रगति का सबसे अच्छा पैमाना हैं। NFHS-4 (2015-16) और NFHS-5 (2019-21) की तुलना से पता चलता है कि कहां सुधार हुआ और कहां चुनौतियां बनी हुई हैं:
| संकेतक | NFHS-4 (2015-16) | NFHS-5 (2019-21) | स्थिति |
|---|---|---|---|
| स्टंटिंग (बच्चे) | 38.4% | 35.5% | सुधार (2.9% की कमी) |
| वेस्टिंग (बच्चे) | 21.0% | 19.3% | मामूली सुधार |
| अंडरवेट (बच्चे) | 35.8% | 32.1% | सुधार |
| एनीमिया (बच्चे 6-59 महीने) | 58.6% | 67.1% | बिगड़ा (+8.5%) |
| एनीमिया (महिलाएं 15-49) | 53.1% | 57.2% | बिगड़ा (+4.1%) |
ये आंकड़े बताते हैं कि पोषण अभियान ने स्टंटिंग में सफलता पाई है, लेकिन एनीमिया एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। तीन में से दो बच्चे और हर दूसरी महिला आज भी खून की कमी से पीड़ित है। क्या हम एनीमिया पर काम करने के तरीके बदलें?
World Bank Impact Assessment
विश्व बैंक ने पोषण अभियान पर एक प्रभाव मूल्यांकन किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पोषण अभियान से आंगनवाड़ी सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और विभागों के बीच तालमेल बेहतर हुआ है। खासकर 11 राज्यों में जहां विश्व बैंक ने ₹8,000 करोड़ का ऋण दिया था, वहां सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ पोषण योजनाएं ही काफी नहीं हैं। साफ पानी, स्वच्छता, और महिला शिक्षा में भी निवेश जरूरी है।
CAG Audit Findings (2021-2024)
हाल ही में कैग (CAG) ने 2021 से 2024 के बीच पोषण अभियान की ऑडिट रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में कई कमियां सामने आई हैं:
- कई राज्यों में आवंटित धन का 50% से कम इस्तेमाल हुआ
- आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे में देरी
- ग्रोथ मॉनिटरिंग में कमजोरी
- डिजिटल ट्रैकिंग में अंतराल
यह रिपोर्ट बताती है कि योजना तो अच्छी है, लेकिन उसे जमीन पर उतारने में अभी भी कई बाधाएं हैं।
Case Study 1 – Haryana Millet Initiative
हरियाणा सरकार ने पोषण अभियान के तहत एक अनोखी पहल शुरू की है। उन्होंने “बाजरा रेसिपी बुक” (मिलेट रेसिपी बुक) तैयार की है, जिसमें बाजरा, ज्वार, रागी से बने पौष्टिक व्यंजनों की रेसिपी दी गई हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इन रेसिपी का इस्तेमाल कर महिलाओं को पोषण के बारे में सिखाती हैं।
इसके अलावा, हरियाणा में “मुख्यमंत्री दुग्ध उपहार योजना” चल रही है। इसके तहत किशोर लड़कियों को सप्ताह में 6 दिन 200 एमएल फोर्टिफाइड स्किम्ड मिल्क दिया जाता है। इसमें विटामिन ए और डी-3 मिलाया गया है। इस योजना के लिए ₹150 करोड़ का बजट रखा गया है। साल 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में हरियाणा में 20 लाख से अधिक पोषण जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। नूंह जिले में अकेले 1,678 किशोर लड़कियों को इस योजना का लाभ मिला।
यह उदाहरण दिखाता है कि राज्य स्तर पर नवाचार कैसे पोषण अभियान को और प्रभावी बना सकते हैं। अगर हर राज्य इसी तरह स्थानीय समाधान निकाले, तो कुपोषण की समस्या जल्द हल हो सकती है।
Case Study 2 – Maharashtra Ghar Angan
महाराष्ट्र में पोषण अभियान के तहत “घर आंगन” नाम का एक अनोखा प्रयोग किया गया। इस योजना के तहत गांव-गांव में स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया। ये स्वयंसेवक घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की पोषण स्थिति की जानकारी लेते हैं। जिन परिवारों में कुपोषण के लक्षण दिखते हैं, उन्हें तुरंत आंगनवाड़ी केंद्र से जोड़ा जाता है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें समुदाय के लोगों को जोड़ा गया है। पहले सरकारी कर्मचारी ही जानकारी इकट्ठा करते थे, लेकिन अब गांव के ही लोग अपने परिवारों और पड़ोसियों की मदद कर रहे हैं। इससे न सिर्फ जानकारी सही मिलती है, बल्कि लोगों में पोषण को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है। महाराष्ट्र में इस मॉडल की सफलता के बाद अब दूसरे राज्य भी इसे अपना रहे हैं।
How to Access Poshan Abhiyaan Services
Finding Your Nearest Anganwadi
अगर आप पोषण अभियान का लाभ लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपने क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र का पता लगाना होगा। हर गांव और शहर के वार्ड में एक आंगनवाड़ी केंद्र होता है। आप अपने स्थानीय नगर निगम, पंचायत कार्यालय, या आशा कार्यकर्ता से आंगनवाड़ी केंद्र के बारे में पूछ सकते हैं। अब पोषण ट्रैकर पोर्टल पर भी आंगनवाड़ी केंद्रों की लोकेशन उपलब्ध है।
Services Available at Anganwadi Centres
आंगनवाड़ी केंद्र पर निम्नलिखित सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध हैं:
- गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पौष्टिक आहार (THR – टेक होम राशन)
- 6 माह से 6 साल के बच्चों के लिए पूरक पोषण आहार
- बच्चों का वजन और ऊंचाई मापना (ग्रोथ मॉनिटरिंग)
- टीकाकरण में सहायता (स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर)
- पोषण संबंधी परामर्श
Using Poshan Tracker App
पोषण ट्रैकर ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऐप पर आप खुद को या अपने बच्चे को रजिस्टर कर सकते हैं। ऐप पर 22 भाषाओं में जानकारी उपलब्ध है। इस ऐप के जरिए आप:
- अपने बच्चे के बढ़ते वजन और ऊंचाई का ग्राफ देख सकते हैं
- टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच की याद दिलाने वाली सूचनाएं पा सकते हैं
- गर्भावस्था और शिशु देखभाल से जुड़ी वीडियो देख सकते हैं
Grievance Redressal Process
अगर आपको कोई शिकायत है, तो आप टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं। यह नंबर देशभर में महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शिकायतों के लिए है। इसके अलावा, आप अपने क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से सीधे संपर्क कर सकते हैं। अगर समस्या का समाधान नहीं होता, तो जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को शिकायत भेजी जा सकती है।
Frequently Asked Questions
1. पोषण अभियान के 5 मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
पांच मुख्य उद्देश्य हैं: स्टंटिंग कम करना, अंडर-न्यूट्रिशन कम करना, एनीमिया कम करना, कम जन्म वजन कम करना, और स्तनपान की दर बढ़ाना। हर उद्देश्य के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित हैं।
2. पोषण अभियान और पोषण 2.0 में क्या अंतर है?
पोषण 2.0 साल 2021 में शुरू हुआ नया चरण है। इसमें आंगनवाड़ी सेवाओं और किशोरियों की पोषण योजना को मिला दिया गया। अब किशोर लड़कियां (11-14 साल) भी इसके दायरे में हैं, और ध्यान “संपूर्ण पोषण” पर है।
3. पोषण अभियान में किसे लाभ मिलता है?
0 से 6 साल के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, और 11 से 14 साल की किशोर लड़कियां इस योजना की लाभार्थी हैं।
4. पोषण ट्रैकर ऐप कैसे काम करता है?
पोषण ट्रैकर ऐप आंगनवाड़ी केंद्रों और लाभार्थियों का रियल-टाइम डेटा रखता है। इससे यह पता चलता है कि किस बच्चे का वजन कम है, किस गर्भवती महिला को टीका नहीं लगा, और कहां पोषण आहार की कमी है।
5. पोषण पखवाड़ा और पोषण माह क्या है?
पोषण पखवाड़ा मार्च-अप्रैल में 15 दिन का अभियान है, और पोषण माह सितंबर में पूरे महीने मनाया जाता है। इन दौरान जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां, और घर-घर जाकर पोषण की जानकारी दी जाती है।
6. क्या पोषण अभियान सफल रहा है?
NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार स्टंटिंग 38.4% से 35.5% हुई है, जो सफलता है। लेकिन एनीमिया बढ़ा है (बच्चों में 58.6% से 67.1%), जो चिंता का विषय है। कुल मिलाकर प्रगति हुई है लेकिन लक्ष्य अभी दूर हैं।
7. पोषण अभियान में एनीमिया की समस्या को कैसे दूर किया जा रहा है?
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 6x6x6 रणनीति लागू की गई है। इसमें आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, किशोरियों को पोषण आहार, और आंगनवाड़ी केंद्रों पर एनीमिया जांच की सुविधा शामिल है।
8. पोषण अभियान का बजट कितना है?
2026-27 के बजट में पोषण 2.0 के लिए ₹23,100 करोड़ का प्रावधान है। कुल मिलाकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को ₹28,183 करोड़ मिले हैं।
9. पोषण अभियान से जुड़ी शिकायत कहां करें?
आप टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं। यह नंबर महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शिकायतों के लिए है। आप अपनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या जिला कार्यक्रम अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।
10. क्या आम लोग पोषण अभियान में भाग ले सकते हैं?
हां, पोषण अभियान का जन आंदोलन हिस्सा है। आप अपने इलाके के पोषण पखवाड़ा या पोषण माह के कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। आप आंगनवाड़ी केंद्र पर जाकर स्वयंसेवक भी बन सकते हैं।
H2: Conclusion
पोषण अभियान भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जो देश से कुपोषण को खत्म करने के लिए बनाया गया है। इसके पांच मुख्य उद्देश्य हैं – स्टंटिंग, अंडर-न्यूट्रिशन, एनीमिया, कम जन्म वजन में कमी, और स्तनपान को बढ़ावा देना। NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि स्टंटिंग में तो कमी आई है, लेकिन एनीमिया एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पोषण 2.0 के रूप में अब योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है, और किशोर लड़कियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के उदाहरण बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर नवाचार से पोषण अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालाँकि, कैग ऑडिट और विश्व बैंक की रिपोर्ट में कई कमियां भी सामने आई हैं, जैसे धन का कम उपयोग और डिजिटल ट्रैकिंग में अंतराल।
पोषण अभियान की सफलता के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं। हर माता-पिता, हर परिवार को पोषण को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा। क्या आपने आज अपने बच्चे का वजन जांचा? क्या आपने गर्भवती महिला को समय पर पौष्टिक आहार दिलाया? ये छोटे-छोटे कदम ही बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
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