What is Stunting in Poshan Abhiyaan? Causes & Prevention

पोषण अभियान में स्टंटिंग क्या है? अगर आप भी यह सवाल गूगल पर सर्च कर रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। हर साल लाखों पेरेंट्स यह जानना चाहते हैं कि उनका बच्चा उम्र के हिसाब से छोटा क्यों है, और क्या इसे ठीक किया जा सकता है। स्टंटिंग एक ऐसी समस्या है जो बच्चे के फिजिकल ग्रोथ और ब्रेन डेवलपमेंट दोनों पर असर डालती है.

पोषण अभियान, जो 2018 में लॉन्च किया गया, इसी समस्या को कम करने के लिए भारत का सबसे बड़ा न्यूट्रिशन मिशन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टंटिंग सिर्फ कमज़ोर दिखने का नाम नहीं है? क्या आपको पता है कि ये बच्चे की फ्यूचर की कमाई और पढ़ाई पर भी असर डालता है? और क्या आप जानते हैं कि घर पर कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप अपने बच्चे को इस प्रॉब्लम से बचा सकते हैं? इस आर्टिकल में हम इन्हीं सवालों के जवाब देंगे, और आपको पोषण अभियान के अंडर स्टंटिंग से रिलेटेड पूरी जानकारी देंगे.

What is Stunting?

Simple Definition

स्टंटिंग का मतलब है बच्चे का उम्र के हिसाब से हाइट का कम होना। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, अगर किसी बच्चे की हाइट उसकी उम्र के नॉर्मल चिल्ड्रेन के कंपैरिजन में 2 स्टैंडर्ड डेविएशन से कम है, तो उसे स्टंटेड कहा जाता है। हिंदी में समझें तो: अगर आपके दो साल के बच्चे की हाइट सिर्फ 18 महीने के बच्चे जितनी है, तो वह स्टंटिंग की कैटेगरी में आ सकता है।

Why Stunting is Different from Being Short

अक्सर पेरेंट्स सोचते हैं कि बच्चा “जेनेटिकली” छोटा है। लेकिन स्टंटिंग जेनेटिक नहीं होता। यह क्रोनिक मालन्यूट्रिशन का रिजल्ट है। इसका मतलब यह है कि बच्चे को महीनों या साल भर में उतना पोषण नहीं मिला जितना उसकी बॉडी को हाइट बढ़ाने के लिए चाहिए था।

How Doctors Measure Stunting

आंगनवाड़ी वर्कर्स और डॉक्टर बच्चे की हाइट मेज़र करते हैं और उसे ग्रोथ चार्ट पर प्लॉट करते हैं। अगर हाइट ग्रोथ कर्व नीचे की तरफ जा रहा है, तो रेड फ्लैग हो जाता है। पोषण ट्रैकर ऐप में यह डेटा रियल-टाइम अपडेट होता है.

YOU MAY ALSO LIKE :

India’s Malnutrition Crisis: Poshan Abhiyaan Reality Check


Stunting vs Wasting vs Underweight

what-is-stunting-in-poshan-abhiyaan-stunting-vs-wasting-vs-underweight

Simple Difference Table

Indicatorमतलबकब होता हैक्या सुधर सकता है?
Stuntingउम्र के हिसाब से हाइट कममहीनों/साल की पोअर न्यूट्रिशनहाइट तो नहीं सुधर सकती, लेकिन और डैमेज रोक सकते हैं
Wastingहाइट के हिसाब से वज़न कमकुछ हफ्ते/महीने की पोअर न्यूट्रिशन या बीमारीहाँ, अच्छा खाना मिलने पर वज़न आ सकता है
Underweightउम्र के हिसाब से वज़न कमदोनों हो सकते हैं, या कोई एककारण पर डिपेंड करता है

Why This Difference Matters

पोषण अभियान के अंडर तीनों इंडिकेटर्स पर फोकस है, लेकिन स्टंटिंग पर सबसे ज़्यादा फोकस क्यों? क्योंकि वेस्टिंग इमरजेंसी होती है, लेकिन स्टंटिंग परमानेंट डैमेज कर सकता है। अगर बच्चा वेस्टेड है तो इमीडिएट इंटरवेंशन से वह वापस हेल्दी हो सकता है। लेकिन स्टंटिंग का असर ज़िंदगी भर रहता है।

Causes of Stunting

Immediate Causes

इमीडिएट कॉज़ेज़ वो हैं जो डायरेक्ट असर डालते हैं:

  • Inadequate dietary intake: बच्चे को रोज़ाना उतना प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स नहीं मिलना जितना उसकी ग्रोथ के लिए ज़रूरी है।
  • Frequent infections: बार-बार डायरिया, रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, या बुखार से बॉडी न्यूट्रिएंट्स एब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाती।

Underlying Causes

ये वो फैक्टर्स हैं जो इमीडिएट कॉज़ेज़ को ट्रिगर करते हैं:

  • Food insecurity: घर में खाने की कमी, या सिर्फ एक तरह का खाना (सिर्फ रोटी-चावल) मिलना।
  • Poor sanitation: ओपन डिफेकेशन, क्लीन ड्रिंकिंग वॉटर न होना। रिपीटेड डायरिया से स्टंटिंग का रिस्क 86.5% तक बढ़ सकता है अगर सैनिटेशन और सप्लीमेंटरी फूड दोनों न हों।
  • Low maternal education: जब माँ को न्यूट्रिशन की जानकारी नहीं होती, तो वह बच्चे को सही समय पर सही खाना नहीं दे पाती।
  • Poor healthcare access: रेगुलर चेकअप नहीं, वैक्सीनेशन मिस होना, और ग्रोथ मॉनिटरिंग का न होना।

Basic Causes

ये रूट कॉज़ेज़ हैं:

  • Poverty: गरीब घर में डाइवर्सिफाइड फूड अफोर्ड करना मुश्किल होता है।
  • Gender inequality: लड़कियों और महिलाओं को कम खाना मिलता है, उनकी एजुकेशन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
  • Lack of social safety nets: कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं जो इमरजेंसी में मदद करे।

Real-World Example

उत्तर प्रदेश के एक गाँव की कहानी। रेखा, जो तीन बच्चों की माँ हैं, उनका दो साल का बेटा हाइट में काफी छोटा था। जब आंगनवाड़ी वर्कर ने चेक किया, पता चला कि बच्चे को रोज़ाना एक बार सिर्फ रोटी मिलती थी, उसमें भी प्रोटीन नहीं था। और घर में शौचालय नहीं था, तो बच्चा बार-बार डायरिया से परेशान था। जब रेखा को सही जानकारी मिली और उन्होंने बच्चे को अंडा, दाल, और साफ पानी दिया, तो हाइट ग्रोथ कर्व में सुधार दिखा।

Effects of Stunting

Brain Development Impact

स्टंटिंग का सबसे खतरनाक असर ब्रेन पर पड़ता है। पहले 1000 दिन में ब्रेन का मैक्सिमम डेवलपमेंट होता है। अगर उस टाइम न्यूट्रिशन नहीं मिलता तो:

  • आईक्यू कम हो जाता है
  • स्कूल में परफॉरमेंस वीक होती है
  • फोकस और मेमोरी प्रॉब्लम्स रहती हैं

Long-Term Health Problems

स्टंटेड बच्चे जब बड़े होते हैं तो उनमें नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज़ का रिस्क बढ़ जाता है:

  • डायबिटीज
  • हार्ट डिजीज
  • हाई ब्लड प्रेशर

Economic Impact

वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक: 1% लॉस इन एडल्ट हाइट ड्यू टू स्टंटिंग = 1.4% लॉस इन इकोनॉमिक प्रोडक्टिविटी। मतलब जो बच्चा स्टंटेड है, वह बड़ा होकर एवरेज से 1.4% कम कमाएगा। देश के लेवल पर, मालन्यूट्रिशन की वजह से भारत का 4% जीडीपी लॉस होता है।

Intergenerational Cycle

सबसे छुपा हुआ इफेक्ट: स्टंटेड लड़कियाँ जब माँ बनती हैं, तो उनके बच्चे भी स्टंटेड होते हैं। क्योंकि उनका खुद का ग्रोथ इनकंप्लीट होता है, और वह प्रेग्नेंसी में सही न्यूट्रिशन नहीं दे पाती। इस तरह यह प्रॉब्लम जनरेशन आफ्टर जनरेशन चलती रहती है।

Statistic: एनएफएचएस-5 के अनुसार, भारत में 35.5% चिल्ड्रेन अंडर 5 स्टंटेड हैं। मतलब 3.2 करोड़ बच्चे स्टंटिंग से अफेक्टेड हैं।

What is Poshan Abhiyaan?

Overview of the Scheme

पोषण अभियान, जिसे नेशनल न्यूट्रिशन मिशन भी कहा जाता है, मार्च 2018 में लॉन्च हुआ। इसका मेन ऑब्जेक्टिव है: 6% स्टंटिंग रिडक्शन इन चिल्ड्रेन (0-6 इयर्स) एट 2% पर अन्नम। यह वर्ल्ड्स लार्जेस्ट न्यूट्रिशन प्रोग्राम है।

Key Pillars

  • First 1000 days focus: गर्भ से लेकर दो साल तक के बच्चों और माओं पर स्पेशल फोकस।
  • Convergence: 18 से ज़्यादा मिनिस्ट्रीज़ (हेल्थ, डब्ल्यूसीडी, ड्रिंकिंग वॉटर, आदि) को एक प्लेटफॉर्म पर लाना।
  • Jan Andolan: न्यूट्रिशन को जन आंदोलन बनाना, हर घर तक मैसेज पहुँचाना।
  • ICT-RTM: पोषण ट्रैकर ऐप से रियल-टाइम मॉनिटरिंग।

Poshan 2.0 Update

2021 में पोषण 2.0 लॉन्च हुआ, जिसमें सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण अभियान को मर्ज कर दिया गया। अब इसका फोकस 112 आस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स पर है।

How Poshan Tracker Works

आंगनवाड़ी वर्कर हर महीने बच्चों की हाइट, वेट मेज़र करती है और पोषण ट्रैकर ऐप में डेटा एंट्री करती है। ऐप 22 लैंग्वेजेज़ में अवेलेबल है। अगर कोई बच्चा स्टंटिंग की कैटेगरी में आता है, तो अलर्ट जेनरेट होता है और फॉलो-अप काउंसलिंग स्टार्ट होती है।

What Poshan Abhiyaan is Doing to Reduce Stunting

First 1000 Days Interventions

यह प्रोग्राम गर्भवती माओं को:

  • आयरन फोलिक एसिड टैबलेट
  • कैल्शियम सप्लीमेंट्स
  • टेक होम राशन (टीएचआर)
  • डाइट पर काउंसलिंग

न्यू बॉर्न बच्चों को:

  • एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन (6 महीने)
  • कॉम्प्लीमेंटरी फीडिंग एजुकेशन (6 महीने के बाद)
  • ग्रोथ मॉनिटरिंग

Convergence with Other Schemes

पोषण अभियान अकेला काम नहीं करता। ये कन्वर्ज करता है:

  • स्वच्छ भारत मिशन: टॉयलेट्स और हैंडवॉशिंग से स्टंटिंग रोकने में 86.5% प्रिवेंशन पॉसिबल।
  • आयुष्मान भारत: हेल्थ चेकअप्स और इम्यूनाइजेशन।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई): प्रेग्नेंट विमेन को कैश इंसेंटिव।

Technology Use: Poshan Tracker

मार्च 2026 तक, 14 लाख आंगनवाड़ी सेंटर्स पोषण ट्रैकर पर रजिस्टर हो चुके हैं। इससे रियल-टाइम पता चल जाता है कि कौन से बच्चे स्टंटेड हैं, कौन से वेस्टेड हैं, और उन्हें इमीडिएट काउंसलिंग मिलती है।

Community-Based Events (CBE)

हर महीने आंगनवाड़ी सेंटर्स पर सीबीई आयोजित की जाती हैं। यहाँ पर मदर्स को न्यूट्रिशन कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन दी जाती हैं, ग्रोथ चार्ट्स दिखाए जाते हैं, और हेल्दी रेसिपीज़ बताई जाती हैं।

Case Study 1: Haryana’s Millet Initiative

हरियाणा में पोषण अभियान के अंडर मिलेट-बेस्ड रेसिपीज़ प्रमोट की गईं। आंगनवाड़ी सेंटर्स पर मिलेट खीर, मिलेट खिचड़ी डिस्ट्रिब्यूट की गई। दो साल में स्टंटिंग रेट 32% से 27% पर आ गया। यह इनिशिएटिव अब दूसरे स्टेट्स में भी कॉपी किया जा रहा है।

How Parents Can Prevent Stunting at Home

During Pregnancy

अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो:

  • रोज़ाना आईएफए टैबलेट लें: 100 टैबलेट प्रेग्नेंसी में कंपल्सरी हैं।
  • प्रोटीन-रिच फूड: अंडा, दाल, सोया, दूध, ग्रीन वेजिटेबल्स।
  • एडीक्वेट रेस्ट: कम से कम 8 घंटे की नींद।
  • रेगुलर चेकअप: आंगनवाड़ी और हेल्थ सेंटर से एएनसी चेकअप कराएँ।

First 6 Months: Exclusive Breastfeeding

  • कोलोस्ट्रम ज़रूर पिलाएँ: पहला पीला दूध बहुत स्ट्रॉन्ग होता है, इसे नहीं निकालना।
  • सिर्फ ब्रेस्ट मिल्क: 6 महीने तक पानी भी नहीं देना, ब्रेस्ट मिल्क में सब कुछ है।
  • डिमांड फीडिंग: जब बच्चा भूखा लगे, तब पिलाएँ।

After 6 Months: Complementary Feeding

6 महीने बाद ब्रेस्टफीडिंग कंटीन्यू रखते हुए, सॉलिड फूड देना शुरू करें:

  • खिचड़ी विद वेजिटेबल्स: मूंग दाल, गाजर, पालक, टमाटर।
  • अंडा: हार्ड-बॉइल्ड अंडा या अंडा करी।
  • मिलेट्स: रागी, ज्वार, बाजरा की खीर।
  • फ्रूट्स: मैश्ड केला, सेब, पपीता।

Example: राजस्थान की आशा, एक आंगनवाड़ी वर्कर, रेगुलरली पेरेंट्स को बताती हैं कि बच्चे की प्लेट में 4 कलर्स ज़रूर होने चाहिए – व्हाइट (चावल/रोटी), येलो (दाल), ग्रीन (सब्ज़ी), रेड (टमाटर/पपीता)।

Sanitation and Hygiene

  • हैंडवॉशिंग: बच्चे को खिलाने से पहले, और बच्चे के हाथ बार-बार धोएँ।
  • सेफ ड्रिंकिंग वॉटर: पानी उबालकर या आरओ से दें।
  • डीवॉर्मिंग: हर 6 महीने में डीवॉर्मिंग टैबलेट (डॉक्टर से पूछिए)।

Growth Monitoring

हर महीने आंगनवाड़ी सेंटर जाएँ। बच्चे की हाइट मेज़र कराएँ। ग्रोथ चार्ट देखें। अगर ग्रोथ कर्व फ्लैट हो या डाउन हो, तो तुरंत आंगनवाड़ी वर्कर या डॉक्टर से कंसल्ट करें।

Case Study 2: Tamil Nadu’s Success

तमिलनाडु में आंगनवाड़ी वर्कर्स ने हर घर जाकर काउंसलिंग की। उन्होंने बताया कि बच्चे को रोज़ाना एक अंडा ज़रूर देना है। इसके साथ ही उन्होंने मिलेट-बेस्ड रेसिपीज़ भी प्रमोट की। तीन साल में स्टंटिंग रेट 27% से 20% हो गया। अब तमिलनाडु उन स्टेट्स में है जहाँ स्टंटिंग सबसे कम है।

Common Questions Asked by Parents

1. Kya stunting sirf gareeb ghar mein hota hai?

नहीं, स्टंटिंग हर इकोनॉमिक क्लास में हो सकता है अगर फीडिंग प्रैक्टिसेज़ सही नहीं हैं। लेकिन गरीब घर में रिस्क ज़्यादा होता है। IJOST 2026 स्टडी के मुताबिक, पुअरेस्ट घर के चिल्ड्रेन को रिचेस्ट घर के चिल्ड्रेन की तुलना में स्टंटिंग होने के ऑड्स 2-3 टाइम्स ज़्यादा होते हैं।

2. Kya stunting thik ho sakta hai?

हाइट तो नहीं सुधर सकती लेकिन प्रॉपर न्यूट्रिशन से बच्चे का ब्रेन डेवलपमेंट इंप्रूव हो सकता है और फ्यूचर डैमेज रोक सकते हैं। प्रिवेंशन ही बेस्ट है।

3. Agar bachcha stunted hai to kya karein?

आंगनवाड़ी वर्कर से तुरंत मिलें। पोषण ट्रैकर डेटा चेक करें। डॉक्टर से कंसल्ट करें। प्रोटीन-रिच डाइट स्टार्ट करें। सैनिटेशन इंप्रूव करें।

4. Kya sirf poshan se stunting rukta hai?

नहीं, सैनिटेशन भी उतना ही इंपॉर्टेंट है। रिपीटेड डायरिया से न्यूट्रिएंट्स एब्ज़ॉर्ब नहीं होते। इसलिए स्वच्छ भारत मिशन भी पोषण अभियान का इंपॉर्टेंट पार्ट है।

5. Poshan Abhiyaan ka stunting reduction target kya hai?

इनिशियली 6% रिडक्शन बाय 2022 (2% पर अन्नम)। अब पोषण 2.0 के अंडर 2026 तक और रिडक्शन का टारगेट है।

6. Kya bachche ko stunting se bachane ke liye angrezi dawai chahiye?

नहीं, लोकल फूड से भी हो सकता है। अंडे, मिलेट्स, दाल, वेजिटेबल्स, फ्रूट्स – ये सब इंडियन किचन में अवेलेबल हैं। सिर्फ सही कॉम्बिनेशन में देना ज़रूरी है।

7. Kya anganwadi worker ko bachche ki height regularly measure karna zaroori hai?

हाँ, हर महीने मेज़र होना चाहिए। अगर नहीं हो रहा तो आप खुद आंगनवाड़ी से पूछिए। पोषण ट्रैकर ऐप में डेटा एंट्री होनी चाहिए।

8. Kya stunting ka asar bachche ki school performance par padta hai?

हाँ, बहुत पड़ता है। स्टंटिंग से आईक्यू कम हो सकता है, फोकस वीक होता है, और फ्यूचर में इकोनॉमिक प्रोडक्टिविटी भी कम होती है।

9. Kya COVID ke baad stunting badha hai?

रिपोर्ट्स इंडिकेट करती हैं कि COVID लॉकडाउन के दौरान न्यूट्रिशन प्रोग्राम्स डिसरप्ट हुए, जिससे कुछ डिस्ट्रिक्ट्स में स्टंटिंग रेट्स टेंपरेरी बढ़ गए। लेकिन पोषण अभियान ने डिजिटल ट्रैकिंग से गैप कवर किया।

10. Kya only government schemes se stunting khatam ho sakta hai?

नहीं, गवर्नमेंट स्कीम फ्रेमवर्क प्रोवाइड करती है। असली चेंज घर में फीडिंग प्रैक्टिसेज़, सैनिटेशन अवेयरनेस, और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन से आता है। पेरेंट्स का एक्टिव इनवॉल्वमेंट ज़रूरी है।

Conclusion

स्टंटिंग एक ऐसी समस्या है जो बच्चे की पूरी लाइफ को शेप करती है। पोषण अभियान ने इस प्रॉब्लम को नेशनल प्रायोरिटी बनाया है, लेकिन असली सक्सेस तब आएगी जब हर पैरेंट समझेगा कि स्टंटिंग सिर्फ “छोटा रहना” नहीं है – यह दिमाग, हेल्थ, और फ्यूचर कमाई पर परमानेंट इफेक्ट है। आप अब क्या कर सकते हैं? अपने बच्चे की हाइट मंथली मेज़र करें। आंगनवाड़ी से काउंसलिंग लें। खाने में डायवर्सिटी लाएँ। साफ-सफाई का ध्यान रखें। और हाँ, पोषण अभियान के जन आंदोलन का हिस्सा बनें – क्योंकि जब पूरी कम्युनिटी साथ आती है, तभी स्टंटिंग से आज़ादी मिलती है.

Leave a Comment