Poshan Abhiyaan me Underweight Kya Hai? Janen Poori Jankari


पोषण अभियान: ‘अंडरवेट’ को समझें

अगर आप सोचते हैं कि “मेरा बच्चा पतला है तो क्या वह अंडरवेट है?”, तो जान लें कि आप अकेले नहीं हैं।

अंडरवेट का मतलब: बच्चे का वज़न उसकी उम्र के हिसाब से कम होना। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘Weight-for-Age’ कहा जाता है।

उदाहरण: यदि आपके बच्चे की उम्र 2 साल है, लेकिन उसका वज़न 8 kg है (जबकि सामान्य वज़न 10-12 kg होना चाहिए), तो वह ‘अंडरवेट’ श्रेणी में आएगा।

NFHS-5 (2019-21) के अनुसार: भारत में 5 साल से कम उम्र के 32% बच्चे अंडरवेट हैं।

पोषण मापदंड (Nutritional Indicators)

इंडिकेटर क्या मापता है? स्थिति का अर्थ
Underweight उम्र के हिसाब से कम वज़न सामान्य कुपोषण
Stunting उम्र के हिसाब से कम लंबाई पुराना (Chronic) कुपोषण
Wasting लंबाई के हिसाब से कम वज़न तात्कालिक (Acute) कुपोषण

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Underweight, Stunting aur Wasting – Kya Antar Hai?

अक्सर लोग इन तीनों को एक समझ लेते हैं, लेकिन पोषण अभियान इनमें अलग-अलग उपाय करता है। नीचे दिए गए टेबल से आप आसानी से समझ सकते हैं:

आप सोचिए: अगर कोई बच्चा लंबा है लेकिन बहुत पतला है – वो वेस्टिंग हो सकता है। अगर बच्चा छोटा और पतला दोनों है – वो अंडरवेट भी है और स्टंटिंग भी। पोषण अभियान तीनों को ट्रैक करता है क्योंकि हर इंडिकेटर अलग-अलग इंटरवेंशन मांगता है

Poshan Abhiyaan Underweight Kaise Define Karta Hai?

पोषण अभियान के ऑफिशियल डॉक्यूमेंट के मुताबिक, अंडरवेट की पहचान WHO के चाइल्ड ग्रोथ स्टैंडर्ड से होती है। आंगनवाड़ी वर्कर आपके बच्चे का वज़न डिजिटल मशीन से निकलता है, फिर उससे उम्र से तुलना करता है। बच्चा तब अंडरवेट कहलाएगा जब उसका वेट-फॉर-एज Z-स्कोर -2 से नीचे हो। (Z-स्कोर एक स्टैटिस्टिकल स्केल है जो नॉर्मल से कितना दूर है बताता है।)

मान लीजिए आपके 2 साल के बच्चे का वज़न 9 kg है। WHO चार्ट के हिसाब से इस उम्र में एवरेज वज़न 12 kg के करीब होता है। फर्क 3 kg का – यानी अंडरवेट ज़ोन में। आंगनवाड़ी वर्कर यह कैलकुलेशन पोषण ट्रैकर ऐप में डालेगा और ऐप अपने आप बता देगा कि बच्चा नॉर्मल है, मॉडरेटली अंडरवेट है या सीवियरली अंडरवेट है


How is Underweight Measured in Anganwadis?

अब आप पूछेंगे: “आंगनवाड़ी में मेरे बच्चे का वज़न कैसे लेते हैं? क्या वो सही होता है?” चलिए समझते हैं। पोषण अभियान ने इस प्रोसेस को बहुत सिस्टमैटिक बनाया है

Growth Monitoring Devices – Kaam Kaise Karte Hain?

हर आंगनवाड़ी सेंटर को तीन में डिवाइस दी गई हैं:

डिजिटल वेइंग स्केल – बच्चे का वज़न निकालने के लिए

इन्फैंटोमीटर – छोटे बच्चे (0-2 साल) की लंबाई नापने के लिए

स्टेडियोमीटर – बड़े बच्चे (2-6 साल) की लंबाई नापने के लिए

हरियाणा सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब 90% से ज़्यादा आंगनवाड़ी में ये डिवाइस उपलब्ध हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि डिवाइस होना और सही से इस्तेमाल करना दोनों ज़रूरी है? आंगनवाड़ी वर्कर को हर महीने ट्रेनिंग दी जाती है। अगर डिवाइस खराब है या वर्कर ने सही से नहीं नापा तो डेटा गलत हो सकता है। इसलिए पोषण अभियान में मॉनिटरिंग का डबल-चेक सिस्टम है

Poshan Tracker App – Real-Time Tracking

जुलाई 2025 से सरकार ने एक नया नियम लागू किया है: हर बेनिफिशियरी का रजिस्ट्रेशन पोषण ट्रैकर ऐप पर फेशियल रिकग्निशन और आधार e-KYC से करना ज़रूरी है। अब आपकी आंगनवाड़ी वर्कर हर महीने बच्चे का वज़न, हाइट और कुछ और पैरामीटर्स ऐप में डालती है। ऐप तुरंत बताता है कि बच्चा अंडरवेट कैटेगरी में आता है या नहीं

एक केस स्टडी देखते हैं: महाराष्ट्र के नंदुरबार ज़िले में 2024 में आंगनवाड़ी वर्कर्स ने पोषण ट्रैकर के अलर्ट का इस्तेमाल किया। जब भी कोई बच्चा बहुत ज़्यादा अंडरवेट दिखा, वर्कर तुरंत उसके घर जाकर टेक होम राशन दिया और हेल्थ चेक-अप करवाया। सिर्फ़ 6 महीने में वहाँ 15% बहुत ज़्यादा अंडरवेट केस कम हुए। यानी टेक्नोलॉजी से फर्क पड़ता है, बस इसका सही होना चाहिए

Monthly Growth Monitoring – Kyun Zaroori Hai?

पोषण अभियान के गाइडलाइन्स कहती हैं: 0-6 साल के हर बच्चे का महीने में कम से कम एक बार वज़न लेना ज़रूरी है। खास तौर पर 15 तारीख को हर आंगनवाड़ी में विलेज हेल्थ सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डे (VHSND) होता है। उस दिन डॉक्टर और आशा दीदी भी आती हैं, और कम वज़न वाले बच्चों पर खास ध्यान दिया जाता है

अगर आप रेगुलर वज़न नहीं लेते हैं तो आपको पता नहीं चलेगा कि बच्चा कब कम वज़न वाला होने लगा। क्या आप जानते हैं कि पहले 1000 दिनों में (गर्भ से 2 साल तक) कम वज़न सबसे ज़्यादा नुकसान करता है? वो दिमाग की डेवलपमेंट को परमानेंटली अफेक्ट कर सकता है। इसलिए महीने का एक दिन निकालकर आंगनवाड़ी ज़रूर जाएं


Main Causes of Underweight in Children

अब तक हमने समझा कि अंडरवेट क्या है और इसे कैसे नापा जाता है। अब सवाल है: आखिर बच्चे अंडरवेट क्यों होते हैं? अक्सर लोग कहते हैं “गरीबी से”, लेकिन असली वजह इससे भी गहरे हैं

Maternal Malnutrition – Pehle 1000 Din

माँ का पोषण सबसे बड़ा कारण है। अगर माँ की गर्भावस्था में कम वज़न है या उससे सही पोषण नहीं मिला, तो बच्चे को कम वज़न होता है। कम वज़न वाले बच्चे के कम वज़न होने के चांस 2-3 गुना ज़्यादा होते हैं

NFHS-5 डेटा बताता है कि भारत में 18.7% महिलाएँ (15-49 साल) कम वज़न वाली हैं। और देखें तो महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) 57% है। जब माँ खुद कमज़ोर है, तो बच्चे को भी कमज़ोर देने का खतरा बढ़ जाता है

Galat Feeding Practices – Breastfeeding aur Complementary Feeding

पोषण अभियान की रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत से बच्चे कम वज़न के होते हैं क्योंकि:

पहला घंटा ब्रेस्टफीडिंग नहीं करवाता – जो कोलोस्ट्रम (पहला दूध) मिलता है वो इम्यूनिटी के लिए अमृत है

6 महीने तक सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग करते हैं – उसके बाद कॉम्प्लिमेंट्री फीडिंग (दाल का पानी, खिचड़ी, वगैरह) नहीं देते

डाइटरी डाइवर्सिटी नहीं होती – सिर्फ चावल या रोटी खिलाते हैं, उसमें प्रोटीन और विटामिन नहीं होते

एक उदाहरण: UP के सीतापुर ज़िले में एक स्टडी में पता चला कि 70% बच्चों को दिन में सिर्फ एक बार खाना मिलता है और वो भी सिर्फ सीरियल-बेस्ड। बच्चों में अंडरवेट रेट 40% से ऊपर था

Recurrent Infections – Diarrhea aur Pneumonia

बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं तो उसका सीधा असर वज़न पर पड़ता है। डायरिया से न्यूट्रिएंट्स बाहर निकल जाते हैं, निमोनिया से शरीर की एनर्जी खत्म होती है। पोषण अभियान के टेक्निकल रिपोर्ट में लिखा है कि बच्चा साल में 3 से ज़्यादा बार डायरिया से पीड़ित हो तो अंडरवेट होने का खतरा 4 गुना बढ़ जाता है

इसके पीछे WASH फैक्टर्स भी हैं – सफाई की कमी, खुले में शौच, साफ पानी की अवेलेबिलिटी। जब बच्चे उल्टी में रहते हैं, वो बार-बार इंफेक्ट होते हैं और उनका वज़न नहीं बढ़ता पता

Poverty, Food Insecurity aur Gender Bias

नोबेल पुरस्कार विजेता एस्तेर डुफ्लो की रिसर्च कहती है कि जब महिलाओं के हाथ में पैसा होता है, तो वो बच्चों के पोषण पर खर्च करती हैं। लेकिन भारत में 49% महिलाएं अपनी कमाई पर कंट्रोल नहीं रखती हैं। गरीब घर में पहले खाना मर्दों को मिलता है, और बच्चे और महिलाएं बाद में

आप सोचिए: अगर घर में चार लोग हैं और खाना सिर्फ तीन लोगों के लिए है – तो बच्चा वो हिस्सा नहीं पाएगा जितना उसे चाहिए। यही “फूड इनसिक्योरिटी” अंडरवेट का छुपा हुआ कारण है


What Government is Doing to Reduce Underweight

पोषण अभियान सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है। इसके तहत बहुत सी एक्टिविटीज़ चलती हैं जो कम वज़न को कम करने में मदद करती हैं। चलिए उन्हें समझाते हैं

Convergence Model – Ek Se Zyada Departments Milkar

पोषण अभियान की सबसे खास बात है कन्वर्जेंस – मतलब महिला और बाल विकास, हेल्थ, पानी, पंचायती राज, स्कूल एजुकेशन, और दूसरे डिपार्टमेंट साथ मिलकर काम करते हैं। एक बच्चे को अगर कम वज़न पाया जाता है, तो आंगनवाड़ी वर्कर, आशा, और ANM तीनों मिलकर उस बच्चे को फॉलो-अप करते हैं

जैसे हरियाणा में “सुपोषण दिवस” ​​मनाया जाता है। इस दिन आंगनवाड़ी सेंटर पर सभी कम वज़न वाले बच्चों की स्पेशल चेक-अप होती है, और माता-पिता को खिलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इस मॉडल से हरियाणा में कम वज़न की दर 34% से 27% तक आई है (NFHS-4 से NFHS-5 के बीच)

Take Home Ration aur Hot Cooked Meal

हर आंगनवाड़ी में टेक होम राशन (THR) दिया जाता है – यह फोर्टिफाइड (विटामिन और मिनरल्स से भरपूर) खाना होता है जैसे पंजीरी, खिचड़ी, वगैरह। गर्भवती महिलाओं और 6-36 महीने के बच्चों को यह THR दिया जाता है। इसका मकसद है कि घर में बच्चे को भी पौष्टिक मिले

लेकिन क्या यह THR असर करता है? एक केस स्टडी: छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में THR डिस्ट्रीब्यूशन को डिजिटल ट्रैकिंग से मज़बूत किया गया। जब हर महीने पक्का राशन पहुंचाने लगा, तो वहां गंभीर रूप से कम वज़न वाले मामलों में 12% कमी आई

Community-Based Events aur Jan Andolan

पोषण अभियान में जन आंदोलन का कॉन्सेप्ट है – मतलब समाज को जागरूक करना। इसके लिए:

पोषण माह (सितंबर) – पूरा महीना न्यूट्रिशन अवेयरनेस प्रोग्राम

पोषण पखवाड़ा (अप्रैल) – 15 दिन की स्पेशल एक्टिविटी

कम्युनिटी-बेस्ड इवेंट्स (CBE) – गांव में लेकर, गोदभराई, अन्नप्राशन, वगैरह पर कम्युनिटी इवेंट्स

इन इवेंट्स में आपको भी बुलाया जाता है। यहां आप सीखते हैं कि बच्चे को क्या खिलाना है, वज़न क्यों नापना है, और अगर कम वज़न है तो क्या करना है

Mission Poshan 2.0 – Naye Updates

2021 से पोषण अभियान मिशन पोषण 2.0 के रूप में बदला है। इसमें फोकस है:

पहले 1000 दिन – गर्भ से 2 साल तक की इंटेंस मॉनिटरिंग

सक्षम आंगनवाड़ी – आंगनवाड़ी सेंटर्स को अपग्रेड किया जा रहा है

टेक्नोलॉजी अपग्रेड – पोषण ट्रैकर ऐप में फेस रिकग्निशन और e-KYC ज़रूरी है

लेटेस्ट अपडेट: 1 जुलाई 2025 से सरकार ने आधार-बेस्ड e-KYC और फेशियल रिकग्निशन को ज़रूरी कर दिया है। अब THR लेने के लिए भी बेनिफिशियरी का फेस स्कैन होता है। इससे डुप्लीकेट बेनिफिशियरी कम होंगे, लेकिन कुछ एरिया में ऐप में ग्लिच की शिकायत भी आ रही है। (आप अपने आंगनवाड़ी से इसकी जांच कर सकते हैं।)


What Parents Should Do If Child is Underweight

अब हम सबसे ज़रूरी हिस्से पर आते हैं – अगर आपका बच्चा अंडरवेट है, तो आप क्या करें? सरकार ने क्या सुविधाएँ दी हैं और आप उनका कैसे इस्तेमाल करें?

Regular Weight Monitoring – Kab Karein?

पहला और सबसे आसान स्टेप: हर महीने आंगनवाड़ी में बच्चे का वज़न ले आएं। VHSND डे (आम तौर पर 15 तारीख को) को ज़रूर जाएं। वज़न लेते समय पूछें कि क्या बच्चा अंडरवेट कैटेगरी में है। अगर ऐप में डेटा डाल रहे हैं तो अपने मोबाइल से फोटो ले लें

अगर आंगनवाड़ी वर्कर रेगुलर वज़न नहीं ले रही है या डिवाइस खराब है, तो आप उसकी सुपरवाइज़र (CDPO) से शिकायत कर सकते हैं

Dietary Diversity – Kya Khilayein?

पोषण अभियान के विशेषज्ञ “½ प्लेट सब्जियां, ¼ प्लेट प्रोटीन, ¼ प्लेट अनाज” का फॉर्मूला देते हैं। आप घर में ये ट्राई करें:

प्रोटीन: अंडा, दाल, सोया, दूध, पनीर (अगर किफायती हो) या साड़ी (सरसों का साग, आदि)

सब्जियाँ: पत्ता गोभी, गाजर, भिंडी, कद्दू – हर रंग की सब्जी

अनाज: चावल, रोटी, बाजरा (रागी, ज्वार, बाजरा) – बाजरा को “पोषण अनाज” कहा जाता है

एक व्यावहारिक उदाहरण: बिहार के मधेपुरा में एक महिला ने अपने कम वजन वाले बच्चों को रागी की खिचड़ी, अंडा और मटर की सब्जी रोज खिलाया। तीन महीने में बच्चे का वजन 1.5 किलो बढ़ गया और वह मध्यम से सामान्य श्रेणी में आ गया

Take Home Ration – Lein Ya Na Lein?

सरकारी टेक होम राशन (THR) फ्री मिलता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन जैसे न्यूट्रिएंट्स मिक्स होते हैं। कुछ पेरेंट्स सोचते हैं “यह सरकारी चीज़ है, क्वालिटी सही नहीं होगी।” लेकिन पोषण अभियान के गाइडलाइंस के मुताबिक THR फोर्टिफाइड होता है और उसकी क्वालिटी चेकिंग होती है

अगर आपको THR की क्वालिटी में कोई प्रॉब्लम दिखे, तो आंगनवाड़ी वर्कर को बताएं। अगर वर्कर नहीं सुनता, तो ब्लॉक ऑफिस में शिकायत करें। लेकिन THR को रिजेक्ट न करें – यह बच्चे को एक्स्ट्रा पोषण देने का एक फ्री सोर्स है

Kab Doctor Ke Paas Jaayein?

अगर आपका बच्चा:

बहुत कम वज़न है (पोषण ट्रैकर में रेड ज़ोन)

बार-बार डायरिया या बुखार होता है

आँखों या पैरों में सूजन है

एक्टिव नहीं है, हमेशा थका हुआ लगता है

तो तुरंत नज़दीकी हेल्थ सेंटर या डॉक्टर से मिलें। VHSND पर आने वाले डॉक्टर से भी गाइडेंस ले सकते हैं


Common Myths About Underweight – Fact Check

अक्सर लोगों के मन में गलतफहमियां होती हैं। चलिए कुछ आम मिथक और उनकी सच्चाई देखते हैं

पोषण: मिथक बनाम तथ्य

मिथक 1 सिर्फ गरीब बच्चे ही अंडरवेट होते हैं।

NFHS-5 के मुताबिक, सबसे अमीर 20% घरों में भी 24% बच्चे अंडरवेट हैं। कुपोषण सिर्फ आय का नहीं, बल्कि सही जानकारी और पहुंच (Access) का मुद्दा है।

मिथक 2 पतला बच्चा मतलब हेल्दी बच्चा है।

पतला होना और अंडरवेट होना अलग है। अगर बच्चा स्वस्थ रूप से पतला है लेकिन वजन उम्र के हिसाब से सही है, तो वह ठीक है। अंडरवेट में वजन उम्र के मानकों से कम होता है।

मिथक 3 अंडरवेट सिर्फ खाना न मिलने से होता है।

इसके पीछे संक्रमण (Infection), स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और फीडिंग की गलत आदतें भी जिम्मेदार हैं। सिर्फ खाना बढ़ाना समाधान नहीं है।

मिथक 4 बच्चा मोटा है, तो वह हेल्दी है।

मोटापा भी कुपोषण का ही एक रूप है। बच्चे का वजन उसकी लंबाई और उम्र दोनों के संतुलन में होना चाहिए।


H2: Frequently Asked Questions

1. Poshan Abhiyaan mein underweight bacche ki pehchan kaise hoti hai?
आंगनवाड़ी वर्कर डिजिटल वेटिंग मशीन से वज़न लेकर पोषण ट्रैकर ऐप में डालती है। ऐप WHO चार्ट से तुलना करके बताता है कि बच्चा अंडरवेट, मॉडरेट या सीवियर कैटेगरी में है

2. Kya underweight aur kुपोषण ek hi cheez hai?
अंडरवेट, कुपोषण का एक इंडिकेटर है। कुपोषण में स्टंटिंग (लंबाई कम) और वेस्टिंग (पतलापन) भी शामिल हैं

3. Mere bacche ka weight nahi badh raha, kya karein?
पहले हर महीने आंगनवाड़ी में वज़न ले आएं। फिर से डाइट में विविधता बढ़ाएं – अंडे, दाल, सब्ज़ियां, बाजरा शामिल करें। अगर बराबर नहीं बढ़ रहा है तो डॉक्टर से मिलें

4. Kya underweight bacche ko vaccine lena chahiye?
हां, सभी वैक्सीन टाइम पर लगवाएं। कम वजन वाले बच्चों को संक्रमण से ज्यादा खतरा होता है, इसलिए वैक्सीन उनकी सुरक्षा के लिए और भी जरूरी है

5. Poshan Tracker app parents bhi use kar sakte hain?
अभी पेरेंट्स के लिए डायरेक्ट ऐप नहीं है, लेकिन आप आंगनवाड़ी वर्कर से अपने बच्चे का डेटा दिखाने को कह सकते हैं। कुछ स्टेट्स में पेरेंट्स के लिए SMS अलर्ट भी भेजे जाते हैं

6. Underweight bacche ke liye sarkar kya kuch free deti hai?
टेक होम राशन (THR), हेल्थ चेक-अप, पेट के कीड़े मारने की गोलियां, आयरन सप्लीमेंट, और रेगुलर मॉनिटरिंग

7. Kya underweight bacche ko special school ki zaroorat hoti hai?
ज़रूरी नहीं, लेकिन अगर बच्चा बहुत कम वज़न का है और डेवलपमेंट में देरी है तो डॉक्टर से असेसमेंट करवाना चाहिए। पोषण अभियान में अर्ली इंटरवेंशन सेंटर भी हैं

8. Aadhaar nahi hai toh kya registration nahi hoga?
पोषण अभियान के लेटेस्ट नियमों के हिसाब से आधार-बेस्ड e-KYC ज़रूरी है। अगर आधार नहीं है तो पहले उसके लिए अप्लाई करें, तब तक आंगनवाड़ी से टेम्पररी इंतज़ाम के बारे में पूछें

9. Underweight bacche ka weight normal hone mein kitna samay lagta hai?
रेगुलर मॉनिटरिंग और सही पोषण से 3-6 महीने में ध्यान देने लायक सुधार आता है। गंभीर मामलों में 6-12 महीने लग सकते हैं

10. Agar Anganwadi worker sahi se weight nahi le rahi toh kahan complain karein?
सबसे पहले सुपरवाइजर (CDPO) से बात करें। अगर वहां समाधान नहीं होता तो जिला महिला एवं बाल विकास ऑफिस में शिकायत करें


Conclusion

आज हमने समझा कि पोषण अभियान में अंडरवेट क्या है – यह सिर्फ “पतला बच्चा” नहीं है, बाल्की एक मेज़रेबल इंडिकेटर है जो बच्चे के पोषण स्टेटस को बताता है। अंडरवेट का मतलब है वेट-फॉर-एज कम होना, और इसका असर बच्चे की बॉडी और दिमाग दोनों पर पड़ता है।

पोषण अभियान ने अंडरवेट को कम करने के लिए एक मज़बूत सिस्टम बनाया है – सही डिवाइस दिए हैं, पोषण ट्रैकर ऐप से रियल-टाइम ट्रैकिंग कर रहे हैं, और जन आंदोलन से जागरूकता बढ़ा रहे हैं। लेकिन इसका सबसे ज़रूरी हिस्सा आप हैं – माँ, बाप, और समाज। जब आप महीने में एक बार आंगनवाड़ी जाएंगी, बच्चे को अलग-अलग खाना खिलाएंगी, और सरकारी सुविधाओं का सही इस्तेमाल करेंगी – तभी अंडरवेट से मुक्त भारत मुमकिन है।

अब आप बताएं: क्या आपने इस महीने अपने बच्चे का वज़न लिया? क्या आप जानते हैं कि आपका बच्चा अंडरवेट कैटेगरी में आता है या नहीं? और अगर आपको कुछ भी समझ नहीं आया, तो क्या आपने आंगनवाड़ी दीदी से पूछने में कोई हिचकी की परेशानी की?


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